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क्या है ऑर्गेनिक फूड : What is Organic Food?

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क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा आहार भी है जिसे खाने से शरीर को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचता है बल्कि इससे शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. जी हां, ये है ऑर्गेनिक आहार. ऑर्गेनिक फूड ऐसे फूड्स होते हैं जिनमें किसी भी तरह के केमिकल्स और पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और ये फूड बेमौसम मिलते भी नहीं हैं

हेल्थ का सीधा रिश्ता डाइट से है। हेल्दी रहने के लिए लोग अब तेजी से ऑर्गेनिक फूड अपना रहे हैं। इसे सेहत के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है। ऑर्गेनिक फूड के तमाम पहलुओं के बारे में एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रही हैं….

क्या है ऑर्गैनिक फूड :

ऑर्गेनिक फूड्स वे फूड्स हैं, जिन्हें किसी केमिकल का इस्तेमाल किए बगैर तैयार और पैक किया जाता है। 

  • ऑर्गेनिक फूड को प्रामाणिक फूड भी कहा जाता है। यानी उत्पादन मानकों को ध्यान में रखकर इन्हें तैयार किया जाता है।
  • इन्हें ऑर्गेनिक फार्म में उपजाया जाता है। उत्पादन के दौरान मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ इस पर नजर रखता है।
  • सामान्य फूड के उलट ऑर्गेनिक फूड उत्पाद सामान्यतया पेस्टिसाइड्स और केमिकल फर्टिलाइजर्स के बिना ही उपजाया जाता है।
  • सामान्य फूड्स और इनमें अंतर कर पाना मुश्किल होता है, क्योंकि रंग, आकार और प्रकार में वे एक जैसे दिखते हैं।
  • पहले केवल छोटे परिवार ही अपने बगीचे में ऑर्गेनिक फूड्स उपजाते थे। इससे बड़े स्तर पर उनकी उपलब्धता नहीं हो पाती थी। ऑर्गेनिक फूड्स केवल छोटे स्टोर्स और किसानों के बाजारों में ही मिल पाते थे।
  • एक और जहां इसने प्रयोग से सेहत को फायदा होता है, वहीं इन की उपज में किसी तरह के कैमिकलों का प्रयोग नहीं किया जाता है जिससे हमारी मृदा खराब नहीं होती है। जो हमारे लिए व आने वाली पीढ़ी के लिए काफी जरूरी है।
  • इसे जैविक खेती भी कहा जाता है।

ऐसे पहचानें :

बाजार में तमाम तरह के फल और सब्जियां उपलब्ध हैं, जो देखने में कुछ ज्यादा ही फ्रेश लगते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे ऑर्गैनिक हैं। ऑर्गैनिक फूड आइटम्स सर्टिफाइड होते हैं या छपे होते हैं। इन पर सर्टिफाइड स्टिकर्स लगे होते हैं या छपे होते हैं। इनका स्वाद भी नॉर्मल फूड से थोड़ा अलग होता है। ऑर्गैनिक मसालों की गंध नॉर्मल मसालों की तुलना में तेज होती है। इसी तरह ऑर्गैनिक सब्जियां गलने में ज्यादा टाइम नहीं लेतीं। जल्दी पक जाती हैं।

आर्गेंनिक फूड के फायदें :

  • ऐसे फूड्स हमें दिल से जुड़ी बीमारियों और कैंसर से बचाते हैं क्योंकि वे फेनॉलिक अवयव लिए होते हैं।
  • ऑर्गेनिक तौर पर उपजाए गए ये फूड्स प्राकृतिक होते हैं, जिन्हें उपजाने के लिए किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
  • ऑर्गेनिक फूड्स पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। ये उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी सतह को नुकसान नहीं पहुंचाते। नतीजतन प्रकृति के और भी करीब कहे जा सकते हैं।
  • शोध बताते हैं कि पारंपरिक फूड के मुकाबले ऑर्गेनिक फूड 10 से 50 प्रतिशत तक अधिक पौष्टिक होते हैं।
  • प्रमाणन निकाय के अधिकारी नियमित रूप से उन फार्म या प्लांट की जांच के लिए दौरे पर आते रहते हैं, जहां ऑर्गेनिक फूड स्टफ्स उपजाए जाते हैं। वे जांचते रहते हैं कि ये फूड तय गुणवत्ता को ध्यान में रखकर उपजाए जा रहे हैं या नहीं। यही वजह और गुण हैं कि ये पारंपरिक फूड को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
  • ऑर्गेनिक फूड्स पर अक्सर लेबल्स लगे होते हैं, इसलिए आप अन्य फूड के मुकाबले उन्हें आसानी से अलग कर सकते हैं या उनकी पहचान कर सकते हैं।
  • पारंपरिक फूड के मुकाबले ऑर्गेनिक फूड लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
  • ऑर्गेनिक फूड में फेनॉलिक कंपाउंड्स मौजूद होते हैं जो हमारे दिल को कार्डियोवस्कुलर रोग और कैंसर के खतरों से बचाकर रखता है।
  • फूड फार्म एनिमल्स भी ऑर्गेनिक फार्मिग के तहत आते हैं जिनकी देखभाल ग्रोथ हार्मोस का प्रयोग किए बिना ही की जाती है। किसान इन बातों का खास ख्याल रखते हैं कि इन जानवरों को अच्छा और संतुलित खानपान दिया जाए।

ऑर्गेनिक फॉर्म्स में उपजाए जाने वाले फलों और सब्जियों में अन्य जरिए से की जाने वाली पैदावार के मुकाबले अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं।

ये हैं खासियतें :

ऑर्गैनिक फूड्स में आमतौर पर जहरीले तत्व नहीं होते क्योंकि इनमें केमिकल्स, पेस्टिसाइड्स, ड्रग्स, प्रिजर्वेटिव जैसी नुकसान पहुंचाने वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। आम फूड आइटम्स में पेस्टिसाइड्स यूज किए जाते हैं। ज्यादातर पेस्टिसाइड्स में ऑर्गेनो-फॉस्फोरस जैसे केमिकल होते हैं, जिनसे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

ये सेहत के लिए काफी फायदेमंद हैं। पारंपरिक फूड के मुकाबले ऑर्गैनिक फूड आइटम्स में 10 से 50 फीसदी तक अधिक पौष्टिक तत्व होते हैं। इसमें विटमिन, मिनरल्स, प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन भी ज्यादा होते हैं। इनमें मौजूद न्यूट्रिशंस दिल की बीमारी, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर, डायबीटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाते हैं।

ऑर्गैनिक फार्म्स में उपजाए जाने वाले फलों और सब्जियों में ज्यादा ऐंटि-ऑक्सिडेंट्स होते हैं क्योंकि इनमें पेस्टिसाइड्स नहीं होते इसलिए ऐसे पोषक तत्व बरकरार रहते हैं जो आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं और आपको बीमारियों से बचाते हैं।

ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और स्किन में निखार लाने में मदद करते हैं। ये शरीर में चर्बी नहीं बढ़ने देते क्योंकि ऑर्गैनिक फूड को प्रोसेस्ड करते वक्त सैचुरेटेड फेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इनसे मोटापा नहीं बढ़ता। ये सुरक्षित भी लंबे समय तक रहते हैं।

ऑर्गैनिक फूड में आम तरीके से उगाई जानेवाली फसल के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व होते हैं क्योंकि इन्हें जिस मिट्टी में उगाया जाता है, वह अधिक उपजाऊ होती है।

ऑर्गैनिक खेती शुरू करने से पहले जमीन को 2 साल के लिए खाली छोड़ा जाता है ताकि मिट्टी में पहले से मिले पेस्टिसाइड्स का असर पूरी तरह खत्म हो सकते। इस वजह से इन उत्पादों में विटमिन और मिनरल अधिक होते हैं।

आजकल लोगों में ऐंटि-बायॉटिक को लेकर प्रतिरोध बढ़ रहा है। इसकी वजह जरूरत न पड़ने पर भी ऐंटि-बायॉटिक लेने के अलावा उन चीजों का सेवन भी है, जो हम खाते हैं क्योंकि उन्हें खराब होने से बचाने के लिए ऐंटि-बायॉटिक दिए जाते हैं। जब हम ऐसी चीजों को खाते हैं तो हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। ऑर्गैनिक फूड्स की वजह से इस नुकसान से हम बच जाते हैं।

ऑर्गैनिक मीट ऐसे जानवरों का होता है, जिन्हें हेल्दी तरीके से पाला गया होता है।

बरकरार रखें फायदा

सही तरीके से पकाने पर ही ऑर्गैनिक फूड फायदा करते हैं। अगर आप ऑर्गैनिक सब्जियों से जंक फूड (पित्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज आदि) या तला-भुना खाना बना रहे हैं तो उसके पोषक तत्व भी कम हो जाएंगे। ऑर्गैनिक फूड को ऑइली बनाकर या इन्हें जंक फूड में तब्दील करके इसके मिनरल्स और विटमिन को नष्ट न करें।

कुछ बड़े ब्रैंड्स

ऑर्गैनिक इंडिया (Organic India)

प्योर ऐंड श्योर (Pure and Sure)

फैब इंडिया (Fab India)

नवधान्या (Navdanya)

डाउन टु अर्थ (Down to Earth)

24 मंत्रा (24 Mantra)

ग्रीन सेंस (Green Sense)

सात्विक (Sattvic)

सन ऑर्गेनोफूड्स (Sun Organofoods)

ऑर्गैनिका (Organica)

सनराइज (Sunrise)

ऑर्गैनिक तत्वा (Organic Tattva)

विजन फ्रेश (Vision Fresh)

(इनके अलावा भी मार्केट में बड़े ब्रैंड्स हैं।)

ये फूड आइटम हैं ज्यादा पॉप्युलर :

ऑर्गैनिक फूड आइटम्स में सीजनल फल और सब्जियों की ज्यादा डिमांड होती है, जैसे कि गर्मियों में तरबूज, खरबूज, आम और सब्जियों में टिंडा, तोरी और लौकी आदि। इसके अलावा मसाले, दाल, चावल, आटा, शहद, ग्रीन टी, हर्ब्स, नारियल तेल और जैतून के तेल (ऑलिव ऑइल) की डिमांड भी बढ़ रही है। जहां तक ब्रैंड्स की बात है तो मार्केट में कई नाम से ऑर्गैनिक फूड उपलब्ध हैं।

कीमत क्यों ज्यादा :

ऑर्गैनिक फूड आइटम्स की पैदावार नॉर्मल फूड आइटम्स के मुकाबले कम है और मांग ज्यादा है इसलिए बाजार में इनके रेट नॉर्मल फूड आइटम्स के मुकाबले ज्यादा होते हैं। आमतौर पर ज्यादातर किसान जैविक खेती की बजाय पारंपरिक तरीके से ही खेती करते हैं। इसके अलावा इनका सर्टिफिकेशन भी महंगा होता है और सब्सिडी भी नहीं मिलती। लेकिन ध्यान रखें कि बरसों तक खाने में पेस्टिसाइड और केमिकल्स खाने के बाद खराब होने वाली सेहत के सामने ऑर्गैनिक फूड की कीमत ज्यादा नहीं है।

ऐसे बढ़ें ऑर्गैनिक की ओर :

अक्सर लोग चाहकर भी ऑर्गैनिक फूड्स शुरू नहीं कर पाते। वजह फेवरिट ब्रैंड का स्वाद, पास की ग्रॉसरी शॉप पर इन फूड आइट्म्स का उपलब्ध न होना और महंगा होना आदि हो सकती है। आप इन आसान स्टेप्स को अपना कर ऑर्गैनिक सफर शुरू कर सकते हैं:-

पूरी ग्रॉसरी लिस्ट को बदलने की न सोचें। थोड़े से शुरू करें। मसलन पहले चावल से शुरू करें। रेड, ब्राउन या बिना पॉलिश वाला, कोई भी चावल चुनें और हफ्ते में कम-से-कम 2 बार यह वाला चावल खाएं। फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ा दें। ब्राउन राइस ज्यादा पौष्टिक होता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराता है। यह वजन कम करने में भी मदद करता है। इसी तरह वाइट शुगर के बजाय गुड़, शक्कर या खांड का इस्तेमाल शुरू करें। इनमें आयरन ज्यादा मात्रा में होता है और रिफाइन नहीं होने की वजह से ये हेल्थ को नुकसान भी नहीं पहुंचातीं।

मौसमी हरी सब्जियों जैसे कि पालक, मेथी, चौलाई, पुदीना, धनिया आदि से शुरू करें। मौसमी होने की वजह से इन्हें खाना यूं भी सेहत के लिए अच्छा है।

ऑर्गैनिक को अपनी पूरी लाइफस्टाइल में शामिल करें। ऑर्गैनिक साबुन, लोशन और नॉन-सिंथेटिक टूथपेस्ट को शुमार करें। अगर बाल कलर करते हैं तो केमिकल-फ्री प्रॉडक्ट यूज करें। इस तरह आप शरीर पर केमिकल के लोड को कम कर पाएंगे।

अपने खानपान में हल्का बदलाव करके भी आप ऑर्गैनिक लाइफ की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। मसलन, वाइट राइस के बजाय ब्राउन राइस खाना शुरू करें।

ये भी जानें :

जिन चीजों पर नेचरल या फार्म फ्रेश लिखा हो, जरूर नहीं कि वे ऑर्गैनिक हों। ये अपने आप में प्रिजर्वेटिव-फ्री हो सकते हैं लेकिन हो सकता है कि इनमें ऐसी सामग्री हो, जिसमें पेस्टिसाइड डाला गया हो या वे जेनिटिकली मॉडिफाइड हों।

डीडीटी जैसे पेस्टिसाइड्स बरसों तक हवा और मिट्टी में मौजूद रहता है। यह नर्वस सिस्टम पर असर डालता है और ब्रेस्ट कैंसर की वजह बन सकता है। इसलिए पेस्टिसाइड्स से जितना दूर रहें, अच्छा है।

अगर ऑर्गैनिक चिप्स, ऑर्गैनिक सोडा या ऑर्गैनिक कुकीज खाएंगे तो सेहत को फायदे के बजाय नुकसान ही होगा।

ऑर्गैनिक फूड की कीमत नॉर्मल फूड आइट्स के मुकाबले करीब 40-50 फीसदी तक ज्यादा होती है।

हर महीने करीब 1200 से 1500 रुपये एक्स्ट्रा की जरूरत पड़ती है ऑर्गैनिक फूड खाने पर।

किसी भी ऑर्गैनिक फूड आइटम को खरीदने से पहले उस पर लिखी सामग्री गौर से पढ़ें क्योंकि कई बार ऑर्गैनिक फूड्स में भी चीनी, नमक, फैट और कैलरी काफी ज्यादा होती हैं।

नॉर्मल फूड को बनाएं सेफ:

अगर आप ऑर्गैनिक फूड की बजाय नॉर्मल फूड खा रहे हैं तो कुछ चीजों का ध्यान रखें:-

किसी एक स्टोर के बजाय अलग-अलग जगहों से और अलग-अलग ब्रैंड के फूड आइट्म खरीदें। इससे आप को बेहतर न्यूट्रिएंट मिल पाएंगे। साथ ही कोई एक पेस्टिसाइड लगातार आपके शरीर में जाने से बच जाएगा।

सीजनल फल और सब्जियां खरीदें। लोकल फार्मस मार्केट से खरीदारी करें।

दालों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं। करीब आधे घंटे भिगोकर रखें और इस पानी को फेंक दें। फिर ताजे पानी में उबालें।

एक लीटर पानी में 1 मिलीलीटर पोटैशियम परमैग्नेट मिलाकर घोल बनाएं। फलों और सब्जियों (खासकर पत्तेदार सब्जियों) को इस घोल में 15-20 मिनट तक भिगोकर रखें। ऐसा करने से इनमें मौजूद हानिकारक केमिकल्स निकल जाते हैं। पोटैशियम परमैग्नेट अगर सॉलिड फॉर्म में है तो 1 लीटर पानी के लिए 1 ग्राम काफी रहेगा।

पोटैशियम परमैग्नेट वैसे तो नजदीकी केमिस्ट से मिल जाएगा। ना मिले तो कम-से-कम 1 चम्मच नमक मिले पानी में जरूर फल और सब्जियों को 30 मिनट के लिए डुबोकर रखें।

घर में बनाएं ऑर्गैनिक गार्डन :

ऑर्गैनिक गार्डनिंग करके आप अपने घर में ही फ्रेश फल-सब्जियां उगा सकते हैं। यह इन्वाइरनमेंट के लिए तो सुरक्षित है, इसमें खर्चा भी कम आता है क्योंकि इनमें महंगे खाद और कीटनाशकों की जरूरत नहीं होती। आप अपने गार्डन के छोटे से हिस्से में जहां धूप आती हो, वहां आसानी से खेती कर सकते हैं। अगर आपके पास सही औजार और उपजाऊ मिट्टी है तो छोटे-से ऑर्गैनिक गार्डन को मेंटेन रखना बहुत आसान है।

कम जगह से शुरुआत :

जब भी इस तरह की गार्डनिंग करने की सोचें तो शुरुआत छोटी जगह से करें। इसे मेंटेन करना आसान होगा और खर्च भी कम आएगा। अगर 4×4 फुट का गार्डन बनाते हैं तो इसमें कई तरह की सब्जियां और हर्ब्स उगा सकते हैं। जरूरत से ज्यादा पौधे न लगाएं।

पौधों का चयन :

कुछ पौधे जैसे टमाटर आदि दूसरी सब्जियों के मुकाबले नाजुक और जल्द खराब होने वाले होते हैं। इस समस्या को कम करने के लिए रोग-प्रतिरोधी (डिसीज रेजिस्टेंट) किस्मों का चयन करें। ऐसे बीज के पैकेट पर ‘रोग-प्रतिरोधक’ लिखा होता है। ऑर्गैनिक गार्डनिंग की सफलता मिट्टी की किस्म पर निर्भर है। इस बात का ध्यान रखें कि जिस मिट्टी में आप गार्डनिंग करना चाहते हैं, वह हेल्दी और उपजाऊ हो। इसमें नियमित रूप से ऑर्गैनिक खाद (नीम पत्ती चूरा या गोबर की खाद) डालकर उसे नम रखें। ध्यान रखें कि मिट्टी नम हो और उसमें घास-फूस न हों। गार्डन में लगे दूसरे पौधे इस मौसम में तेजी से बढ़ जाते हैं इसलिए समय-समय पर इनकी कटाई-छंटाई करते रहें। इसके अलावा गमलों और गार्डन में फालतू पानी भी जमा नहीं होने दें। मौसमी फलों और सब्जियों की जानकारी रखें। अगर थोड़ी-बहुत फालतू घास या दूसरे पौधे निकल आते हैं तो उनसे परेशान न हों। सबसे जरूरी है कि आप अपने गार्डन का प्राकृतिक चक्र बनाए रखें। चिड़ियां, केंचुए और कीट-पतंगों को गार्डन में आने दें। इनमें से कुछ जीव आपके गार्डन के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं।

अगर कीड़ा लग जाए :

पौधों में अगर कीड़ा या फफूंद लग जाए तो ऑर्गैनिक पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल करें। पौधों में कीड़े लगने पर नीम के तेल या नीम वाले पेस्टिसाइड का इस्तेमाल करें। 5 मिली दवा को एक लीटर पानी में घोलकर प्रभावित जगह पर स्प्रे करें। इसके अलावा कई बार फफूंद भी लग जाती है। इसके लिए फफूंदनाशी ट्राईकोडर्मा वीरडी का इस्तेमाल करें। ट्राईकोडर्मा वीरडी दवा पाउडर के रूप में आती है। 2 ग्राम पाउडर को एक लीटर में पानी में घोलकर स्प्रे करें। हालांकि बुवाई से पहले अगर बीजों को बीजामृत से ट्रीट कर लें तो कीट, बीमारी या फफूंद लगने का खतरा काफी कम हो जाता है।

पौधा सूखने लगें तो क्या करें :

पौधों के सूखने की वजह अलग-अलग हो सकती है, जैसे पौधों में न्यूट्रिशंस की कमी होना, दीमक या किसी कीड़े का पौधों में लग जाना आदि। ऐसे में किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का इस्तेमाल करें।

3 Comments
  1. Lokesh says

    Awesome .

  2. AffiliateLabz says

    Great content! Super high-quality! Keep it up! 🙂

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